साहिर लुधियानवी Shayari in Hindi मेरे सरकश तराने सुन के दुनिया ये समझती है

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Sahir Ludhianvi shayari – Mere Sarakash Taraane Sun Ke Duniyaa Ye Samajhatee Hai

मेरे सरकश तराने सुन के दुनिया ये समझती है

कि शायद मेरे दिल को इश्क़ के नग़्मों से नफ़रत है

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मुझे हंगामा-ए-जंग-ओ-जदल में कैफ़ मिलता है

मेरी फ़ितरत को ख़ूँरेज़ी के अफ़सानों से रग़्बत है

मेरी दुनिया में कुछ वक़’अत नहीं है रक़्स-ओ-नग़्में की

मेरा महबूब नग़्मा शोर-ए-आहंग-ए-बग़ावत है

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मगर ऐ काश! देखें वो मेरी पुरसोज़ रातों को

मैं जब तारों पे नज़रें गाड़कर आसूँ बहाता हूँ

तसव्वुर बनके भूली वारदातें याद आती हैं

तो सोज़-ओ-दर्द की शिद्दत से पहरों तिलमिलाता हूँ

कोई ख़्वाबों में ख़्वाबीदा उमंगों को जगाती है

तो अपनी ज़िन्दगी को मौत के पहलू में पाता हूँ

मैं शायर हूँ मुझे फ़ितरत के नज़्ज़ारों से उल्फ़त है

मेरा दिल दुश्मन-ए-नग़्मा-सराई हो नहीं सकता

मुझे इन्सानियत का दर्द भी बख़्शा है क़ुदरत ने

मेरा मक़सद फ़क़त शोला नवाई हो नहीं सकता

जवाँ हूँ मैं जवानी लग़्ज़िशों का एक तूफ़ाँ है

मेरी बातों में रंगे-ए-पारसाई हो नहीं सकता

मेरे सरकश तरानों की हक़ीक़त है तो इतनी है

कि जब मैं देखता हूँ भूक के मारे किसानों को

ग़रीबों को, मुफ़्लिसों को, बेकसों को, बेसहारों को

सिसकती नाज़नीनों को, तड़पते नौजवानों को

हुकूमत के तशद्दुद को, अमारत के तकब्बुर को
किसी के चिथड़ों को और शहन्शाही ख़ज़ानों को
तो दिल ताब-ए-निशात-ए-बज़्म-ए-इश्रत ला नहीं सकता
मैं चाहूँ भी तो ख़्वाब-आवार तराने गा नहीं सकता

साहिर लुधियानवी की शायरी – चंद बेहतरीन शेर

Sahir Ludhianvi Poetry – Mere Sarakash Taraane Sun Ke Duniyaa Ye Samajhatee Hai

Mere Sarakash Taraane Sun Ke Duniyaa Ye Samajhatee Hai

ki shaayada mere dila ko ishqa ke nagmom se nafarata hai

mujhe hangaamaa-e-janga-o-jadala mem kaifa milataa hai

meree fitarata ko khoom’rezee ke afasaanom se ragbata hai

meree duniyaa mem kuchha vaqa’ata naheem hai raqsa-o-nagmem kee

meraa mahabooba nagmaa shora-e-aahanga-e-bagaavata hai

magara ai kaasha! dekhem vo meree purasoza raatom ko

maim jaba taarom pe nazarem gaarakara aasoom’ bahaataa hoom’

tasavvura banake bhoolee vaaradaatem yaada aatee haim

to soza-o-darda kee shiddata se paharom tilamilaataa hoom’

koee khvaabom mem khvaabeedaa umangom ko jagaatee hai

to apanee zindagee ko mauta ke pahaloo mem paataa hoom’

maim shaayara hoom’ mujhe fitarata ke nazzaarom se ulfata hai

meraa dila dushmana-e-nagmaa-saraaee ho naheem sakataa

mujhe insaaniyata kaa darda bhee bakhshaa hai qudarata ne

meraa maqasada faqata sholaa navaaee ho naheem sakataa

javaam’ hoom’ maim javaanee lagzishom kaa eka toofaam’ hai

meree baatom mem range-e-paarasaaee ho naheem sakataa

mere sarakasha taraanom kee haqeeqata hai to itanee hai

ki jaba maim dekhataa hoom’ bhooka ke maare kisaanom ko

gareebom ko, muflisom ko, bekasom ko, besahaarom ko

sisakatee naazaneenom ko, tarapate naujavaanom ko

Sahir Ludhianvi– Mere Sarakash Taraane Sun Ke Duniyaa Ye Samajhatee Hai (in Urdu)

میرے سَرَکَشَ تَرانے سُنَ کے دُنِیا یے سَمَجھَتِی ہَے

کِ شایَدَ میرے دِلَ کو اِشْقَ کے نَغْموں سے نَفَرَتَ ہَے

مُجھے ہَںگاما-اے-جَںگَ-او-جَدَلَ میں کَیفَ مِلَتا ہَے

میرِی فِتَرَتَ کو خُوںریزِی کے اَفَسانوں سے رَغْبَتَ ہَے

میرِی دُنِیا میں کُچھَ وَقَ’اَتَ نَہِیں ہَے رَقْسَ-او-نَغْمیں کِی

میرا مَہَبُوبَ نَغْما شورَ-اے-آہَںگَ-اے-بَغاوَتَ ہَے

مَگَرَ اَے کاشَ! دیکھیں وو میرِی پُرَسوزَ راتوں کو

مَیں جَبَ تاروں پے نَزَریں گاڑَکَرَ آسُوں بَہاتا ہُوں

تَسَوُّرَ بَنَکے بھُولِی وارَداتیں یادَ آتِی ہَیں

تو سوزَ-او-دَرْدَ کِی شِدَّتَ سے پَہَروں تِلَمِلاتا ہُوں

کوئی خْوابوں میں خْوابِیدا اُمَںگوں کو جَگاتِی ہَے

تو اَپَنِی زِنْدَگِی کو مَوتَ کے پَہَلُو میں پاتا ہُوں

مَیں شایَرَ ہُوں مُجھے فِتَرَتَ کے نَزّاروں سے اُلْفَتَ ہَے

میرا دِلَ دُشْمَنَ-اے-نَغْما-سَرائی ہو نَہِیں سَکَتا

مُجھے اِنْسانِیَتَ کا دَرْدَ بھِی بَخْشا ہَے قُدَرَتَ نے

میرا مَقَسَدَ فَقَتَ شولا نَوائی ہو نَہِیں سَکَتا

جَواں ہُوں مَیں جَوانِی لَغْزِشوں کا ایکَ تُوفاں ہَے

میرِی باتوں میں رَںگے-اے-پارَسائی ہو نَہِیں سَکَتا

میرے سَرَکَشَ تَرانوں کِی ہَقِیقَتَ ہَے تو اِتَنِی ہَے

کِ جَبَ مَیں دیکھَتا ہُوں بھُوکَ کے مارے کِسانوں کو

غَرِیبوں کو، مُفْلِسوں کو، بیکَسوں کو، بیسَہاروں کو

سِسَکَتِی نازَنِینوں کو، تَڑَپَتے نَوجَوانوں کو

Sahir Ludhianvi– Mere Sarakash Taraane Sun Ke Duniyaa Ye Samajhatee Hai (in Punjabi)

ਮੇਰੇ ਸਰਕਸ਼ ਤਰਾਨੇ ਸੁਨ ਕੇ ਦੁਨਿਯਾ ਯੇ ਸਮਝਤੀ ਹੈ

ਕਿ ਸ਼ਾਯਦ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਕੋ ਇਸ਼੍ਕ਼ ਕੇ ਨਗ਼੍ਮੋਂ ਸੇ ਨਫ਼ਰਤ ਹੈ

ਮੁਝੇ ਹੰਗਾਮਾ-ਏ-ਜੰਗ-ਓ-ਜਦਲ ਮੇਂ ਕੈਫ਼ ਮਿਲਤਾ ਹੈ

ਮੇਰੀ ਫ਼ਿਤਰਤ ਕੋ ਖ਼ੂਁਰੇਜ਼ੀ ਕੇ ਅਫ਼ਸਾਨੋਂ ਸੇ ਰਗ਼੍ਬਤ ਹੈ

ਮੇਰੀ ਦੁਨਿਯਾ ਮੇਂ ਕੁਛ ਵਕ਼’ਅਤ ਨਹੀਂ ਹੈ ਰਕ਼੍ਸ-ਓ-ਨਗ਼੍ਮੇਂ ਕੀ

ਮੇਰਾ ਮਹਬੂਬ ਨਗ਼੍ਮਾ ਸ਼ੋਰ-ਏ-ਆਹੰਗ-ਏ-ਬਗ਼ਾਵਤ ਹੈ

ਮਗਰ ਐ ਕਾਸ਼! ਦੇਖੇਂ ਵੋ ਮੇਰੀ ਪੁਰਸੋਜ਼ ਰਾਤੋਂ ਕੋ

ਮੈਂ ਜਬ ਤਾਰੋਂ ਪੇ ਨਜ਼ਰੇਂ ਗਾੜਕਰ ਆਸੂਁ ਬਹਾਤਾ ਹੂਁ

ਤਸੱਵੁਰ ਬਨਕੇ ਭੂਲੀ ਵਾਰਦਾਤੇਂ ਯਾਦ ਆਤੀ ਹੈਂ

ਤੋ ਸੋਜ਼-ਓ-ਦਰ੍ਦ ਕੀ ਸ਼ਿੱਦਤ ਸੇ ਪਹਰੋਂ ਤਿਲਮਿਲਾਤਾ ਹੂਁ

ਕੋਈ ਖ਼੍ਵਾਬੋਂ ਮੇਂ ਖ਼੍ਵਾਬੀਦਾ ਉਮੰਗੋਂ ਕੋ ਜਗਾਤੀ ਹੈ

ਤੋ ਅਪਨੀ ਜ਼ਿਨ੍ਦਗੀ ਕੋ ਮੌਤ ਕੇ ਪਹਲੂ ਮੇਂ ਪਾਤਾ ਹੂਁ

ਮੈਂ ਸ਼ਾਯਰ ਹੂਁ ਮੁਝੇ ਫ਼ਿਤਰਤ ਕੇ ਨੱਜ਼ਾਰੋਂ ਸੇ ਉਲ੍ਫ਼ਤ ਹੈ

ਮੇਰਾ ਦਿਲ ਦੁਸ਼੍ਮਨ-ਏ-ਨਗ਼੍ਮਾ-ਸਰਾਈ ਹੋ ਨਹੀਂ ਸਕਤਾ

ਮੁਝੇ ਇਨ੍ਸਾਨਿਯਤ ਕਾ ਦਰ੍ਦ ਭੀ ਬਖ਼੍ਸ਼ਾ ਹੈ ਕ਼ੁਦਰਤ ਨੇ

ਮੇਰਾ ਮਕ਼ਸਦ ਫ਼ਕ਼ਤ ਸ਼ੋਲਾ ਨਵਾਈ ਹੋ ਨਹੀਂ ਸਕਤਾ

ਜਵਾਁ ਹੂਁ ਮੈਂ ਜਵਾਨੀ ਲਗ਼੍ਜ਼ਿਸ਼ੋਂ ਕਾ ਏਕ ਤੂਫ਼ਾਁ ਹੈ

ਮੇਰੀ ਬਾਤੋਂ ਮੇਂ ਰੰਗੇ-ਏ-ਪਾਰਸਾਈ ਹੋ ਨਹੀਂ ਸਕਤਾ

ਮੇਰੇ ਸਰਕਸ਼ ਤਰਾਨੋਂ ਕੀ ਹਕ਼ੀਕ਼ਤ ਹੈ ਤੋ ਇਤਨੀ ਹੈ

ਕਿ ਜਬ ਮੈਂ ਦੇਖਤਾ ਹੂਁ ਭੂਕ ਕੇ ਮਾਰੇ ਕਿਸਾਨੋਂ ਕੋ

ਗ਼ਰੀਬੋਂ ਕੋ, ਮੁਫ਼੍ਲਿਸੋਂ ਕੋ, ਬੇਕਸੋਂ ਕੋ, ਬੇਸਹਾਰੋਂ ਕੋ

ਸਿਸਕਤੀ ਨਾਜ਼ਨੀਨੋਂ ਕੋ, ਤੜਪਤੇ ਨੌਜਵਾਨੋਂ ਕੋ

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