सुषुम-सेतु पर खड़ी थी, बीत गया दिन आह में कौनसा अलंकार है?

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सुषुम-सेतु पर खड़ी थी , बीत गया दिन आह में कौनसा अलंकार है?

सुषुम-सेतु पर खड़ी थी , बीत गया दिन आह में कौनसा अलंकार है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।

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सुषुम-सेतु पर खड़ी थी , बीत गया दिन आह में रूपक अलंकार है। प्रस्तुत पंक्ति में यह कहा गया है कि कवियत्री सुषमना नाड़ी रूपी पुल पर खडी रही लेकिन दिन रूपी जीवन यूँहि बीत गया। इस काव्य पंक्ति में सुषमन नाड़ी को पुल के रूप में व्यंजित किया गया है इसलिए यहाँ रुपक अलंकार है।

दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि सुषमन नाड़ी और पुल में कोई अंतर न होने के कारण दोनों को एक मान लिया गया है। इसलिए इसमें उपमेय पर उपमान का आरोप कहते है।

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इस उदाहरण में जहां जहां पर उपमेय और उपमान आए हैं, वो हमने विद्यार्थियों की सहायता के लिए नीचे लिख दिये हैं:-

उपमेय- उपमान

सुषमा नाड़ी – पुल

जहां किन्हीं दो व्यक्ति या वस्तुओं में इतनी समानता हो कि दोनों में अंतर करना मुश्किल हो जाए वहां रूपक अलंकार होता है।

अथवा जहां उपमेय उपमान का रूप धारण कर ले वहां रूपक अलंकार होता है। रूपक अलंकार अर्थालंकार का एक प्रकार है।

सुषुम-सेतु पर खड़ी थी , बीत गया दिन आह में रूपक अलंकार से संबन्धित प्रश्न परीक्षा में कई प्रकार से पूछे जाते हैं। जैसे कि – यहाँ पर कौन सा अलंकार है? दी गई पंक्तियों में कौन सा अलंकार है? दिया गया पद्यान्श कौन से अलंकार का उदाहरण है? पद्यांश की पंक्ति में कौन-कौन सा अलंकार है, आदि।

सुषुम-सेतु पर खड़ी थी , बीत गया दिन आह पंक्तियों में रूपक अलंकार के अलावा और कौन सा अलंकार उपस्थित है?

स की आवृति के कारण अनुप्रास अलंकार की उपस्थिति है।

Important Alankar in Hindi अलंकार के उदाहरण एवं हिन्दी अलंकार पर प्रश्न जो परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।

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